Explore a curated collection of Guru Ji’s vani gathered from various sources.
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वर्तमान क्षण में जियो
ॐ असतो मा सद्गमय।तमसो मा ज्योतिर्गमय।मृत्योर्मामृतं गमय ॥ हम प्रत्येक दिन को नव वर्ष-नव जन्म वरात्रि निद्रा को मृत्यु माने …
आत्मा
मैं तत्व की बात बोलता हूँ, वो है आत्मा,वो है आप।आप देह नही है।आत्मा जो शब्द है,आ से आनन्द शब्द …
सर्वं इश्वरम्
हम बताये मार्ग में चलने के बजाय मार्ग बताने वाले को पकड़ लेते है मंजिल इसीलिए नही मिलती !—————जिनका ध्यान …
योग वसिष्ठ
—-चित्त में कर्तापन का अभाव ही उत्तम समाधान है,वही आनंदमय परमपद है।—-समस्त प्राणियों के भीतर जैसा भाव होता है,वैसा ही …
निराकार
निर्गुण सगुण होकर साकार होता है।साकार-सा+आकार।सा=वह।वह शक्ति जो कार्य करती है।कार, कुरु(धातु)से बना है।कार><कारि=कार्य।निर्गुण होते हुए वह गुणयुक्त है।जब निर्गुण …
आत्मोद्धार
जहाँ से हम आये है,वही हमे जानना है,वही कर्तव्य है और यही धर्म है ।जब तक तुम्हे आत्मा सर्वज्ञ है,पर …
सर्वशक्तिमान
जब आत्मा सर्वज्ञ है सर्वत्र है सर्वशक्तिमान है तो फिर चिंता क्या है?चिंता किस बात की?मनुष्य एक ब्रम्हांड है उसमें …
विद्या
यह मानव शरीर ईश्वर की कृति का बेजोड़ नमूना है,जो बुद्धि और ज्ञान से सीमित है।वही आत्म-योग से परम स्थिति …
निर्विकार
हमारे अंधकार को मिटाकर जो हमें प्रकाश में ला दे,ज्ञान करा दे,बोध करा दे,आत्मबोध करा दे- उसको सतगुरु कहते है। …
विष्णु ,
ईश्वर जो सर्वत्र ,कण- कण ,घट -घट में विश्व के अणु रेणु में व्याप्त है इसलिए विष्णु भी कहते है …
वचन
गुरु अर्थात सदगुरु ! सत मायने आत्मा , आत्मा परम है इसलिए परमात्मा कहते है , कुंडलनी , भगवान , …
परमशक्ति
,वो शक्ति परमशक्ति है,क्योंकि सृष्टि के पहले एक सत के सिवाय कुछ भी नहीं था।इसलिए शक्ति ही ओत प्रोत दिखती …
दिव्य शक्ति
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता | नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: || अर्थात हे दिव्य शक्ति [Divine Energy] जो सभी …
चिन्तन
—-मुझे आत्मदर्शन नही हुआ,यह सब भ्रांतिपूर्ण बातें है,आत्मा ही तो तुम हो, आत्मा से ही सब कार्य हो रहा है,तुमको …
अद्भुत रस
हमारा जो पद है,वो आत्मा है।जो हमारे भीतर है,वह सूर्य की तरह प्रकाशित है।अनन्त सूर्यों का सूर्य है।वो तुम्हारा आधार …
प्रकृति
बिना सब तरफ से मन को समेटे ईश दर्शन नहीं होता।वासना दूर होते ही परमात्मा दिखाई पड़ता है।जब साधक की …
आत्मबुद्धि
हम कुछ करें या न करें परन्तु हमारे भीतर जो शक्ति है कुन्डलिनी शक्ति,महाशक्ति,दिव्य शक्ति वो सदा सक्रिय है हम …
भक्ति
—-स्वयं को खोजना ही भक्ति है,ज्ञान है।ज्ञान में डुबकी लगाकर ही कुछ हासिल होता है।—-आत्मा ही दैविक है,मन अत्यधिक शक्तिशाली …
निर्गुण
1,अगर वो डर गया।आगे प्रोसेस नहीं होने दिया,तो लौट जाता है, वापस नीचे आ जाता है।बहुत से साधक,ये मरण के …
।। ध्यान ।।
दीक्षा के समय गुरु शिष्य के अन्तर में प्रविष्ट होकर अंतर्यामी रूप से शब्द ब्रम्हमय ज्ञान का दान करता ह …
संस्कृति
आज हमारी हालत ये है,अब हम अपने भी नहीं रह गये, अपने तक तो ठीक है,अब हम अपने भी नहीं …
संस्कृति
आज हमारी हालत ये है,अब हम अपने भी नहीं रह गये, अपने तक तो ठीक है,अब हम अपने भी नहीं …
जन्मतः सब शुद्र
प्रत्येक व्यक्ति चाहे किसी आश्रम में हो,चाहे किसी भी वर्ग या वर्ण का हो-जन्मतः सब शुद्र है।—-जनेऊँ संस्कार/उपनयन संस्कार जब …
ब्रम्हचर्य
हमारे में जो है विद्यमान,जिसके निकलने पर ये शरीर को जला दिया जाता है,वो क्या है?वो आप है,हम देह नहीं …
ब्रम्हचर्य
हमारे में जो है विद्यमान,जिसके निकलने पर ये शरीर को जला दिया जाता है,वो क्या है?वो आप है,हम देह नहीं …
डेस्टिनी
—-बाहर के आकर्षण से ही सब कृतियाँ होती रहती है,अंतिम स्वास पर्यन्त कोई भी उसका भरोसा नहीं करता कि वो …
विश्वास
वेदांत में भी घुसने पर भी साधुओं के वर्ग है।तीन केंद्र तक तो मायावी केंद्र है, भू, भुर्व, स्वः ये …
विश्वास
वेदांत में भी घुसने पर भी साधुओं के वर्ग है।तीन केंद्र तक तो मायावी केंद्र है, भू, भुर्व, स्वः ये …
धर्म
1.कर्म करना धर्म है ! पर कौन सा कर्म ?कर्तव्य कर्म अर्थात करने योग्य कर्म और वह है-निष्काम कर्म !आत्म …
धर्म
1.कर्म करना धर्म है ! पर कौन सा कर्म ?कर्तव्य कर्म अर्थात करने योग्य कर्म और वह है-निष्काम कर्म !आत्म …
त्यागी
एको अपि कृष्णस्य कृतः प्रणामो दशाश्वमेधाभृतेन तुल्यः दशाश्वमेधि पुनरेति जन्म कृष्णा प्रणामी न पुनर्भवाय !!अर्थात् -एक बार भगवान् कृष्ण को …
एक ही साधे सब सधै
आध्यात्म -आत्मज्ञान और विज्ञान अलग-अलग नही है ! आत्मज्ञान, विज्ञान की पूर्णता है ,चरम है ! इसे जानने के बाद …
प्रवचन
ज्योति-प्रकाश पर्व ,दीपावली की शुभकामनाये -आत्मा स्वयं ज्योतिर्भवती !ईश्वर का निराकार स्वरूप है, प्रकाश-ज्योति- नूर-Light !भाषा भिन्न है पर वो …
प्रवचन
ज्योति-प्रकाश पर्व ,दीपावली की शुभकामनाएं -आत्मा स्वयं ज्योतिर्भवति !ईश्वर का निराकार स्वरूप है, प्रकाश-ज्योति- नूर-Light !भाषा भिन्न है पर वो …
एकत्व
भक्त भक्ति भगवंत गुरु चतुर नाम बपु एक। इनके पद बंदन किए नासहिं बिघ्न अनेक॥ भगवान् श्री राम हनुमान जी …
एकत्व
भक्त भक्ति भगवंत गुरु चतुर नाम बपु एक। इनके पद बंदन किए नासहिं बिघ्न अनेक॥ भगवान् श्री राम हनुमान जी …
निर्लिप्तता
[श्रीकृष्ण[गीता ] व श्री सद्गुरुजी के प्रवचन पर आधारित ]- 1.मन का बाहर किसी [ व्यक्ति या पदार्थ ] में …
सर्वं खल्विदं ब्रह्मम्
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ! नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:!! -अर्थात हे दिव्य शक्ति [Divine Energy] जो सभी भूतो …
सर्वं खल्विदं ब्रह्मम्
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ! नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:!! -अर्थात हे दिव्य शक्ति [Divine Energy] जो सभी भूतो …
अभ्यास
—-ये जो बीज [दीक्षा ] दिया गया है,ब्रम्ह विद्या दी गई है, धीरे-धीरे अभ्यास करते हुए,उपरामता को प्राप्त कर ,धैर्ययुक्त …