।। ध्यान ।।

दीक्षा के समय गुरु शिष्य के अन्तर में प्रविष्ट होकर अंतर्यामी रूप से शब्द ब्रम्हमय ज्ञान का दान करता ह गुरूजी के चरणों को लक्ष्य में रखना ,ध्यान करते करते मणिवत ,स्फटिक मणि के समान दसो नख हो जाते है,तब ग्रंथि,संशय दूर हो जाते है। स्व का अध्ययन ही ध्यान है।उस परमतत्व की ओर जहाँ …

संस्कृति

आज हमारी हालत ये है,अब हम अपने भी नहीं रह गये, अपने तक तो ठीक है,अब हम अपने भी नहीं रह गये,अब हम कहीं के नहीं रह गये।अनेक दुर्देव,दुर्गति,अनेक ग्रास जो फैले हुए है,और हम चले जा रहे है।उठो जागो।और श्रेष्ठ व्यक्ति को प्राप्त करके,आप जब तक उनकी तरह नहीं हो जाते,महाशक्ति को प्राप्त नहीं …

Live Idol

Following are some excerpt from the discourse in the session: It is essential to let the bhakti blossom within our hearts rather than searching Lord like a wanderer. Manu Ji and Sathroopa Ji once asked Lord, “We want you as our son.” Lord said, “If I come, Maya shall come as well. It is an inseparable part.” Manu Ji and Sathroopa Ji thought for a while and …

ब्रम्हचर्य

हमारे में जो है विद्यमान,जिसके निकलने पर ये शरीर को जला दिया जाता है,वो क्या है?वो आप है,हम देह नहीं आत्मा है।सत माने एनर्जी,सत माने कॉस्मिक एनर्जी,सत माने डिवाइन एनर्जी।सत माने जिसकी ये सत्ता है।सत माने आत्मा।इसी सत्ता से सारी दुनिया खड़ी हुई है और साइंटिस्ट भी सब,उसी ओर जा रहे है।वो सत है। —-जीवात्मा …

डेस्टिनी

—-बाहर के आकर्षण से ही सब कृतियाँ होती रहती है,अंतिम स्वास पर्यन्त कोई भी उसका भरोसा नहीं करता कि वो कब बदल जाएगा।शरीर के नौ द्वारों से हम बाहर के संस्कार लेते है और उस ओर खिंचते चले जाते है। मनुष्य के मूल संस्कार इतने जबरे है कि वो जानता है कि ये अच्छा नहीं,फिर …

Trishul

Tri means three and Shool means a thorn. Trishul is the weapon of Shiva Ji. There are three hindrances, the thorns in our lives. We have conceived these triplets as the inevitable parts of our lives. Attachment, greed, jealousy, etc are included in this classification. These are the thorns, which we acquire from the world …