ढाई अक्षर प्रेम का या तीन पद से युक्त ऐसा शब्द। जिसे गायत्री कहा गया।जिसका आकार बना दिया गया।जिसकी कोई आवश्यकता नहीं है। पद जो होता है,उसका कोई नाम नहीं। ॐ को ही कहा गया। वो आत्मदेव है। जो अपने में स्थित है।स्थिर है। स्वयं ज्योति है।सूर्य का वर्ण है।स्वर्ण जैसा। वही हमारे अंदर-बाहर,ऊपर-नीचे है।और …
दृढ़ अभ्यास
—-पहले आसन दृढ़ होना चाहिए, अनुकूल आसन आचरण में लाना चाहिए।समय नियत कर ले,और ईष्ट को याद करे।बैठने से श्वास प्रश्वास धीरे धीरे कम होता जायेगा।सब कुछ जो है वो आसन में है।दृढ़ निश्चय के साथ बैठकर सद्गुरु ने जो बताया है,वैसा ही संकल्प के साथ करना।—-मन बड़ा चंचल है,कभी स्थिर नही होता,लेकिन मन को …
क्षण
बिंदु
—-उसे फिर से यह शरीर प्राप्त नहीं होता है,शरीर प्राप्त होता है।लेकिन ज्योर्तिमय पिंड है,उसका शरीर ज्योर्तिमय हो जाता है।—-रूप तो खोल मात्र है,अंदर वही है,और मैं ही वही हूँ।स्वरूप चिन्तन के इसी भाव में मगन रहते है।ज्ञानियों का यही भाव है,यही ज्ञान है।—-एक सेल से आप,अनेक सेल में देह पाये है।अब आकुंचन के द्वारा …
बिंदु
—-उसे फिर से यह शरीर प्राप्त नहीं होता है,शरीर प्राप्त होता है।लेकिन ज्योर्तिमय पिंड है,उसका शरीर ज्योर्तिमय हो जाता है।—-रूप तो खोल मात्र है,अंदर वही है,और मैं ही वही हूँ।स्वरूप चिन्तन के इसी भाव में मगन रहते है।ज्ञानियों का यही भाव है,यही ज्ञान है।—-एक सेल से आप,अनेक सेल में देह पाये है।अब आकुंचन के द्वारा …
मौन
अभ्यास, निष्काम कर्म धर्म रूप बन जाये,तो वह ऐसा व्यसनी हो जाता है कि रात और दिन बगैर बोले चाले उसके मुँह से हरे राम हरे कृष्ण निकलते रहता है।वो कार्य करता रहता है तो भी निकलते रहता है,सब काम करते वो होते रहता है।वो उसका धर्म बन जाता है,माने निश्चल अटल हो जाता है। …
सत्य
प्रत्येक व्यक्ति चाहे किसी आश्रम में हो,चाहे किसी भी वर्ग या वर्ण का हो-जन्मतः सब शुद्र है।जनेऊँ संस्कार/उपनयन संस्कार जब कर दिया जाता है-द्विज/दूसरा जन्म, होता है।वेदों के अध्ययन के पश्चात अभ्यास जो जाता है,तब वो-विप्र होता है।ब्रम्ह,जो परम आत्मा हो जाता है,तब उसको -ब्राम्हण कहा गया है।वो चाहे कोई भी हो।अभ्यास,अध्ययन के बाद उस …
सत्य
प्रत्येक व्यक्ति चाहे किसी आश्रम में हो,चाहे किसी भी वर्ग या वर्ण का हो-जन्मतः सब शुद्र है।जनेऊँ संस्कार/उपनयन संस्कार जब कर दिया जाता है-द्विज/दूसरा जन्म, होता है।वेदों के अध्ययन के पश्चात अभ्यास जो जाता है,तब वो-विप्र होता है।ब्रम्ह,जो परम आत्मा हो जाता है,तब उसको -ब्राम्हण कहा गया है।वो चाहे कोई भी हो।अभ्यास,अध्ययन के बाद उस …
